संवेदनशीलता

‘‘संवेदनशीलता’’ जैसे जटिल विषय पर मैं अपने अनुभव के आधार पर विचार प्रस्तुत कर रही हूं। मुझे महसूस होता है कि संवेदनशीलता की भावना का मनुष्य के जीवन में अहम् मूल्य है। सुख-दुख तो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का अभिन्न अंग है। अपने दुखों के बारे में सोचते रहने के साथ-साथ दूसरों के दुखों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार को ‘‘संवेदनशीलता’’ कहा जा सकता है।

संवेदनशीलता इंसानियत की निशानी है:

संवेदनशीलता से यह बोध होता है कि हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के प्रति उदारता, हमदर्दी, सहानुभूति, सम्मान, गरिमा के साथ पेश आता है। संवेदनशीलता से यह विचार कि ‘हम सभी इंसान हैं’ और ’सभी बराबर हैं’ मुखर होता है।

संवेदनशीलता से जुड़ी एक घटना

12 अगस्त, 2019, को मैं अपनी दवाई खरीदने के लिए घर से निकली। ड्राइवर साहब छुट्टी पर थे। दिन में लगभग 11 बजे कड़ी धूप में रिक्शा से निकल पड़ी। रिक्शा वाले ने मुझे तारामंडल के सामने ‘सोना मेडिकल’ तक पहुंचाया। वह वापसी के लिए इंतजार करने को राज़ी हो गया।

सोना मेडिकल में मुझे दवाई नहीं मिली। वह चिंतित हो उठा। उसने कहा अब आप कहां से दवाई लेंगी। मैंने कहा कि बहुत धूप है, अशोक राजपथ जाना मुश्किल लग रहा है – आप वापस ही चलें। उसने मुझे कहा कि आपको बड़ी दुकान में ले चलता हूं, और साथ में यह भी ऑफर किया कि वह खुद मेरी दवाई खरीद देगा। खैर, एक दुकान में दवाई का सबसिटियूट मैंने खरीद लिया। रिक्शेवाले की संवेदनशीलता मुझे भा गई।

घर पहुंच कर मैंने यह कह कर, तय किए गए भाड़े से मात्र दस रुपए अधिक दिए, कि बहुत कड़ी धूप है, आप यह रख लें!

उस रिक्शेवाले का जवाब था कि कुछ लोग जो समझते हैं, वे अपने-आप ही तय भाड़े से अधिक पैसे दे देते हैं।

उस वक्त एहसास हुआ कि हम दोनों के बीच एक सुखद आत्मीयता स्थापित हो गई है।

 

वाकई जब संवेदनशीलता हमारी बौद्धिकता के साथ जुड़ जाए, तो हम एक समतावादी, गरिमामयी, न्यायपूर्ण समाज की ओर बढ़ सकते हैं।

अगर आपको भी ऐसा कोई दैनिक जीवन में संवेदनशील अनुभव हुआ हो, तो अवश्य शेयर करें। समाज में सकारात्मक रवैया ही नागरिकों के सुखमय जीवन में सहायक होगा!  

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One Thought to “संवेदनशीलता”

  1. Subodh Kumar Sinha

    संवेदनशीलता जटिल नहीं वरन् एक सरल विषय है। और ना ही स्वाभाविक सहानुभूति होना। यह एक मानवीय ही नहीं बल्कि हर सजीव प्राणी का गुण है।
    विशेष और जटिल है “सहानुभूति” नहीं , “समानुभूति”…. सब ठीक पर ….. रिक्शेवाले की दवाई खरीद देने वाली बात कुछ अतिशयोक्ति लग रही …वैसे सोना मेडिकल में कोई दवा या उसके सुब्स्टिच्युट का ना मिलना भी अतिशयोक्ति ही लग रहा, पर हो सकता है … anyway … संवेदनशीलता का विश्लेषण और प्रदर्शन … अच्छा प्रयास है ….

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